Tuesday, 26 January 2016

Saturday, 23 January 2016

Thursday, 21 January 2016

Simple and sweet

Simple but Sweet..

         All the problems
         are stuck between
        "Mind" & "Matter".
         If u don't "Mind",
         It doesn't "Matters".
����Gm����

Wednesday, 20 January 2016

Thursday, 10 September 2015

Najariya

एक छोटा सा बच्चा अपने दोनों हाथों में एक एक एप्पल लेकर खड़ा था

उसके पापा ने मुस्कराते हुए कहा कि
"बेटा एक एप्पल मुझे दे दो"

इतना सुनते ही उस बच्चे ने एक एप्पल को दांतो से कुतर लिया.

उसके पापा कुछ बोल पाते उसके पहले ही उसने अपने दूसरे एप्पल को भी दांतों से कुतर लिया

अपने छोटे से बेटे की इस हरकत को देखकर बाप ठगा सा रह गया और उसके चेहरे पर मुस्कान गायब हो गई थी...
तभी उसके बेटे ने अपने नन्हे हाथ आगे की ओर बढाते हुए पापा को कहा....
"पापा ये लो.. ये वाला ज्यादा मीठा है.

शायद हम कभी कभी पूरी बात जाने बिना निष्कर्ष पर पहुंच जाते हैं..
किसी ने क्या खूब लिखा है:

नजर का आपरेशन
तो सम्भव है,
पर नजरिये का नही..!!! ����

���� फर्क सिर्फ सोच का
होता है.....
वरना , वही सीढ़ियां ऊपर भी जाती है ,और निचे भी आती है ����

Wednesday, 2 September 2015

Motivational

एक पहलवान
जैसा,
हट्टा-
कट्टा,
लंबा-
चौड़ा
व्यक्ति
सामान
लेकर किसी
स्टेशन
पर उतरा।
उसनेँ एक
टैक्सी वाले
से कहा कि मुझे साईँ बाबा के मंदिर जाना है।
टैक्सी वाले नेँ कहा- 200 रुपये लगेँगे। उस पहलवान
आदमी नेँ बुद्दिमानी दिखाते हुए कहा- इतने
पास के दो सौ रुपये, आप टैक्सी वाले तो लूट रहे
हो। मैँ अपना सामान खुद ही उठा कर चला
जाऊँगा।
वह व्यक्ति काफी दूर तक सामान लेकर चलता
रहा। कुछ देर बाद पुन: उसे वही टैक्सी वाला
दिखा, अब उस आदमी ने फिर टैक्सी वाले से
पूछा – भैया अब तो मैने आधा से ज्यादा दुरी तर
कर ली है तो अब आप कितना रुपये लेँगे?
टैक्सी वाले नेँ जवाब दिया- 400 रुपये।
उस आदमी नेँ फिर कहा- पहले दो सौ रुपये, अब
चार सौ रुपये, ऐसा क्योँ।
टैक्सी वाले नेँ जवाब दिया- महोदय, इतनी देर
से आप साईँ मंदिर की विपरीत दिशा मेँ दौड़
लगा रहे हैँ जबकि साईँ मँदिर तो दुसरी तरफ है।
उस पहलवान व्यक्ति नेँ कुछ भी नहीँ कहा और
चुपचाप टैक्सी मेँ बैठ गया।
इसी तरह जिँदगी के कई मुकाम मेँ हम किसी चीज
को बिना गंभीरता से सोचे सीधे काम शुरु कर
देते हैँ, और फिर अपनी मेहनत और समय को बर्बाद
कर उस काम को आधा ही करके छोड़ देते हैँ।
किसी भी काम को हाथ मेँ लेनेँ से
पहले पुरी तरह सोच विचार लेवेँ कि क्या जो
आप कर रहे हैँ वो आपके लक्ष्य का हिस्सा है कि
नहीँ।
हमेशा एक बात याद रखेँ कि दिशा सही होनेँ
पर ही मेहनत पूरा रंग लाती है और यदि दिशा
ही गलत हो तो आप कितनी भी मेहनत का कोई
लाभ नहीं मिल पायेगा। इसीलिए दिशा तय
करेँ और आगे बढ़ेँ कामयाबी आपके हाथ जरुर
थामेगी।